1-- होरी तब भी दीन था, होरी अब भी दीन ।
ग्राम वही, धनिया वही, पानी वही जमीन ।।
2---खेती में ही रात दिन ,मरता रहा किसान ।
मगर न मिल पायी उसे,इज्जत कहो सचान ।।
3---
ग्राम वही, धनिया वही, पानी वही जमीन ।।
2---खेती में ही रात दिन ,मरता रहा किसान ।
मगर न मिल पायी उसे,इज्जत कहो सचान ।।
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