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Wednesday, June 6, 2018

दोहे किसानों के लिये

1-- होरी तब भी दीन था, होरी अब भी दीन ।
     ग्राम वही, धनिया वही, पानी वही जमीन ।।
 2---खेती में ही रात दिन ,मरता रहा किसान ।
      मगर न मिल पायी उसे,इज्जत कहो सचान ।।
3---

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